कछु तो ख़ास है हमाये बुंदेलखंड में पढ़ें और गर्व से शेयर करें

कोई भी बाहर का डाक्टर बुन्देलखंड के गांवो में आकर डाक्टर की प्रेक्टिस नहीं कर सकता!!!!!!!!!!!
            *क्यों*
क्योंकि..बुन्देलखंड के मरीज की बीमारी बुन्देलखंड के डाक्टर के अलावा कोई समझ ही नहीं सकता!!!!!!!!! *जैसे*??
छाती में आंधी सी उठत है
आंखें गड़त है
पेट जरत है
मूड़ पिरात है
पेट भड़भड़ात है
डकार आवत है
कान सनसनाट है
पेट गुड़गुड़ात है
माथो भन्नात है
हाथ-गोड़े झुनझुनात
        ऐसी-ऐसी बीमारियां सुनकर
अच्छे से अच्छे एमबीबीएस डाक्टर्स को भी अपनी डिग्री पर शक होने लगता है कि, साला कहीं ये चैप्टर छूट तो नहीं गया
        ☺????
गर्व से कहिये कि हम बुन्देलखंड के हैं।
क्योंकि.
हमारे बुन्देलखंड में
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1.सूरज निकलता नहीं “भुन्सारो” हो जात !
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2.यहाँ के लोग कपडे धोते नहीं “फींच” लेते हैं।
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3.हमारे यहाँ के लोग अपने बालों की कंघी नहीं करते, “बार ऊँछ” लेते हैं।
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4.हमारे यहाँ जब कोई बच्चा रोता है तो हम उसे चुप नहीं कराते “मौंगा” देते हैं।
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5.हम लोग किसी को मारते नहीं “कुचर” देते हैं।
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6.यहाँ जब पानी गिरता है तो कीचड नहीं होता “खपचर्रो “मच जात है।
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7.यहाँ कोई किसी से नाराज नही   होता , “बस फूल” जाता है
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8.यहाॅ कोई फालतू नहीं घूमता बस ।।।।।। इते उते फिरत” रहात है।
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9.खाने के बाद हमारा पेट नहीं भरता, हम “अफर” जाते है !
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10. हम दौडते नहीं “कुर्रू ” लगाते है
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11. हमारे यहां शाम नही होती “कुबेरा ” हो जाती है।
????????  हमारे यहाँ नहाते नहीं , “सपरलेत”
?अपन एकई बात के तो घमण्ड में है?
के अपनौ घर बुन्देलखण्ड मे है !
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घाम लगे ना ठंड
जय हो  बुन्देलखंड
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     ??राम राम ??

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