तोता की आत्म कथा ( संदर्भ सीबीआई )

सचिन चौधरी संपादक बुंदेली बौछार 7970281421

नमस्कार देश वासियो
कैसे हैं
हम कौन.. वही तोता, जिसको आप लोगों ने बदनाम कर रखा है आजकल.. हिंदुस्तान में..
पहले तो एक बात बताइए ज़रा कि हर बुरी चीज में हम बेजुबानों को काहे घसीटते हो भाई..
बे अक्ल हो तो गधा, धुन में चले तो भैंस, काला हो तो कौवा और पिंजरे में हो तो तोता..
कैसे आप किसी की गुलामी को तोता का नाम दे सकते हैं..
चलो आपको अपनी यानि तोता की कुछ खासियत बताते हैं

हमारी उड़ने की स्पीड
टाइगर की दौड़ने की स्पीड के बराबर होती है.. वो आपके भोपाल वाले पराजित टाइगर वाली नहीं असली वाली.. आपको पता है कि हम तोता मात्र 50 मिनट में दिल्ली को पार कर सकते हैं.. फिर भी आप आप अपनी उस संस्था से मेरी तुलना करते हो जो अपने आका के बिना उड़ना तो दूर रेंग भी नहीं सकती..
चलो आपको अपनी यानि तोता की एक और खूबी बताते हैं..
हम तोता दुनिया के इकलौते पक्षी हैं जो भोजन को पैरों में पकड़ कर खाता हैं.. लेकिन आपका तथा कथित तोता तो सिर्फ अपने मालिक के पैरों को पकड़कर खाने को कुख्यात हो चुका है..
अब आपका सवाल यह होगा कि तोते.. आज शायद ज़्यादा मिर्च खा गया.. इसलिए फड़फड़ा रहा है.. तू भी तो पिंजरे में अपने मालिक की कैद में उसका हुक्म बजाता है.. और यहां ज्ञान बांट के अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रहा है..

तो सुनो ज़रा गौर से.. हम जंगल के प्राणी हैं जिसे तुम इंसान छल से कैद करते हो.. और अपने इशारों पे नचाते हो.. जबकि तुम्हारे फर्जी तोता जानबूझकर इशारों पे नाचने के लिए अपने पैरों में घुंघरू लिए घूमते हैं..
हम जंगल में रहते हैं तो मस्ती में और पिंजरे में भी रहते हैं तो मिर्च खाकर भी मीठा ही बोलते हैं.. हम खुद भले पिंजरे में कैद हो जाएं लेकिन कभी किसी पर दुर्भावना पूर्ति के लिए इस्तेमाल नहीं होते..
सबसे बड़ी बात.. इंसानों की बस्ती में हम पिंजरे में कैद हों, और अगर कोई नया मालिक हमें खरीद ले, तो भी हम अपने पुराने मालिक को काटते नहीं..

मतलब यह कि हम पक्षी वक्त है बदलाव टाइप बदलते नहीं.. इसीलिए या तो सुकून से पिंजरे को ही अपना संसार समझ कर खुश रहते हैं या फिर किसी शिकारी के हाथों शहीद हो जाते हैं.. आपके सो कॉल्ड तोता जैसे बेइज्जत नहीं होते.. किसी सफेद बिल्ली की यह हिम्मत नहीं कि वह हम पर झपट्टा मारने की कोशिश भी करे..

खैर ..आप इंसानों को समझाना किसी मूर्खता से कम नहीं.. क्योंकि बोलते हमें रट्टू तोता हो और करते अपने मन की हो..
फिर भी कुछ कहता हूं .. पक्षी बिरादरी की ओर से ..

तोता कोई भी हो सुंदर, वफादार, फुर्तीला और न्यायप्रिय होता है.. लेकिन फिर भी हमारे व्यक्तित्व में बस एक कमी है.. कि मालिक या ट्रेनर की बातों या आदेशों को मानने का नैसर्गिक गुण या अवगुण हममें होता है… इसीलिए हमारी तमाम खूबियों से परे हमें भला बुरा कहा जाता है.. जबकि तोता बुरा या भला खुद नहीं होता.. उसका मालिक होता है.. सो अपनी अक्ल मालिक पर लगाओ तोते पे नही…

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