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श्रावण मास : इसलिये हैं उज्जैन के बाबा महाकाल, सबसे विशेष

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साभार -रमेश रंजन त्रिपाठी

ॐ नमः शिवाय॥

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख, उज्जैन (एमपी) में विराजमान, विश्वप्रसिद्ध महाकलेश्वर भगवान की अद्भुत विशेषताएं-

(1) ऐसा अकेला मंदिर जहां ब्रह्म मुहूर्त में भोलेनाथ का भस्म से श्रृंगार किया जाता है।
(2) भस्म आरती के समय अभिषेक-पूजन नियमित पंडे-पुजारी करते हैं परंतु आरती के पूर्व भस्म का श्रृंगार एक सन्यासी करता है। बाबा महाकाल को भस्म चढ़ाने का अधिकार केवल सन्यासी को है किसी अन्य को नहीं।
(3) भस्म आरती में प्रयुक्त होने वाली भस्म, निरंतर प्रज्ज्वलित होने वाली अग्नि में, गोवंश के गोबर से बने उपलों से तैयार की जाती है।
(4) महाकाल बाबा का मंदिर, साल में एक बार, महाशिवरात्रि में पूरी रात खुला रहता है जिसमें भगवान का रात्रि में महाभिषेक किया जाता है।
(5) महाशिवरात्रि में महाकाल बाबा को दूल्हा बनाया जाता है। भोलेनाथ की दूल्हे के वेष की अद्भुत छटा का वर्णन लेखनी और वाणी से संभव नहीं है।
(6) महाशिवरात्रि के अगले दिन भस्म आरती ब्रह्म मुहूर्त में नहीं अपितु दोपहर में होती है।
(7) श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को महाकाल-राजा नगर भ्रमण पर निकलते हैं। हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे वाली महाकालेश्वर की इस सवारी में लाखों भक्त उनके साथ चलते हैं, अगवानी करते हैं और पूजा-पाठ के रूप में अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं।
(8) महाकाल बाबा की सवारी की अगवानी स्वयं कलेक्टर करते हैं।
(9) वर्ष में एक बार बैकुंठ चतुर्दशी (कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी) को महाकाल भगवान अपनी सवारी में गाजे-बाजे, आतिशबाजी और हजारों भक्तों के साथ भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण से मिलने जाते है। यह अनोखा प्रसंग ‘हरि-हर मिलन’ के नाम से विख्यात है। माना जाता है कि देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के यहां विश्राम करने जाते हैं तब वे संसार का भार शिव जी को सौंप देते हैं। देवउठनी एकादशी के पश्चात बैकुंठ चतुर्दशी को शिव जी जगत की सत्ता विष्णुदेव को वापस सौंप कर तप करने कैलाश चले जाते हैं।
(10) महाकाल मंदिर के प्रथम तल पर भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर है जो वर्ष में केवल एक बार श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोला जाता है। नागपंचमी के दिन दूर-दूर से लाखों भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने यहां आते हैं।
(11) महाकाल प्रभु के दक्षिणमुखी होने से इनका इनका विलक्षण तांत्रिक महात्म्य है। मान्यता है कि महाकाल के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
(12) ऐसी मान्यता है कि महाकाल भगवान का मंदिर ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु है।
(13) और, सबसे महत्वपूर्ण बात, भगवान महाकाल से, सच्चे मन से, की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती।

करालं महाकाल कालं कृपालुं,
गुणागार संसार पारं नतोऽहम्‌ ॥

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