Home बवाली लाल किले की आत्मकथा 

लाल किले की आत्मकथा 

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सचिन चौधरी @ बुंदेली बौछार

नमस्कार देशवासियों। हम आपके जाने पहचाने लाल किला।
एक बेर हमने एक आदमी से पूछी के तुमाओ काम धंधो कैसो चल रओ। 
वे बोले बढि़या चल रओ। बर्तन के एक्सपोर्ट इंपोर्ट को धंधो है।
हमने पूछे कि माल कहां से लिया रये
वे बोले – फिलहाल तो घर के ही बेंच रये
हमाई सरकार भी विकास के नाम पे धरोहरें ऐसई बेच रई। मनों मेक इन इण्डिया की जगां सेल ऑफ़ इण्डिया को अभियान चला रई हो।
जो सब पढ़ के आपखों हंसी आ रई हुईये। लेकिन जे हमाये दर्द की दास्तां है। हमाई आंख में आंसू हैं। आज हमाये कर्णधारों ने हमें ठेका पे दे दओ। कहे हैं कि हमाई साफ सफाई और व्यवस्था बनावो उनके बस की नईंया। अरे जब हम जैसे किले की सफाई बस की नईंया तो देश भर में झाड़ू का घुईयां छीलवे खों लगा रये
एक गर्व हमें हमेशा रओ। जब 1648 में हम बने तो शायद हम इकलौती ऐसी चीज हते जीये मुगलकाल,अंग्रेजी राज और आजाद हिंदुस्तान के लोकतंत्र में बराबर को सम्मान मिले। मुगलों के हम पसंदीदा हते। अंग्रेजों के भी लाड़ले हते। लेकिन जब हिंदुस्तान की आजादी को पहलो तिरंगा हमाई प्राचीर पे फहराओ गओ तो यकीन मानों हम खुद खों शहंशाह शाहजहां से भी ऊपर समझन लगे। 

 


हम पे पूरे हिंदुस्तान को अहसान है। सबको लाड़ प्यार हमें मिले। हम भी दुनिया जहान के थपेड़े खाकर भारत के गौरव के प्रतीक बने रये। साल 2000 में हम पे आतंकी हमला भी भओ। हमाये देश के वीर जवानों ने हमला नाकाम कर दओ। ऊ दिन हम छलनी होवे से बच गए।
मनों सच मानों असल में आज हम तार तार हो गए। विदेशी आतंकियों के हाथ से नईं बल्कि अपनी सरकार के हाथों।
हमाई प्राचीर से पूरे देश खों संबोधन करवे वालों ने हमें ठिकाने लगा दओ । हर साल आजादी दिवस के मौके पर हमाई छाती पे चढ़ के देश के विकास को डंका पीटत ते और अब दुनिया खों बतावे में शर्म न आई कि सरकार की लाल किले को रखरखाव करवे की भी औकात नईं बची। गली गली में झाड़ू लगाके फोटो खिंचाने वाले लालकिले के आंगन में सफाई नईं करा पा रये।
खैर जैसी जिसकी सोच और जैसी जिसकी किस्मत।
हमें यानि लाल किले को अपने ठेके पे जावे के दुख से ज्यादा ई बात को डर है के नओ ठेकेदार का करिहे। कऊं लाल किले की प्राचीर तो भाषण देवे के लाने हर घंटा किराये पे न दे दे। सोच के भी घबरा रये हम। एक टेंशन और हो रई। सरकार से हमाओ रखरखाव नई हो रओ तो पूरे देश को रखरखाव कैसे हुईये। और ऐसे में कऊं पूरो देश तो ठेका पे नईं दे दें।
खैर सरकार हैं। सो करें सो सई। मनों एक बात कयें के इतनी ही खुन्नस है देश की विरासतों से तो सीधी जेसीबी ले आओ और रौंद दो सबको। समतल करो, प्लॉट बेंच दो। ई में आप लोग एक्सपर्ट भी हो। खामखां यूं बेइज्जत न करो। हमाई तो ठीक है मनो हम देश की इज्जत हैं।

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