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काश कोई सिद्धार्थ की तकलीफ को कॉफी संग बांट लेता

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#सिद्धार्थ #सीसीडी

साभार – आशीष जैन

तमाम अनुकूलताओं, सफलताओं का दौर देखा सेलिब्रेट भी किया, इस सब के दौरान निकटतम से लेकर सुदूर के रिश्ते, परिचित, सहकर्मी, कर्मचारी, स्टाफ, सब रहे होंगे न । लेकिन अनपेक्षित प्रतिकूलता के आने की आहट के साथ ही व्यक्ति इतना अकेला, इतना एकाकी, नैराश्य और अपराधबोध से ग्रस्त कि किसी एक से भी अपनी बात न कह सका । इतनी बड़ी दुनियां में एक भी शख्स ऐसा नहीं मिला जिसके साथ वो काफी पीता और सुना सकता अपनी पीड़ा। किसी ने प्रेम का इजहार किया होगा, किसी ने अपने दिल खोलकर रखा होगा, किसी ने अपनी शिकायतों की पोटली खोलकर रखी होगी, किसी ने अपने रूठे को मनाया होगा, किसी ने किसी को जीवन भर के लिये चुन लिया होगा, कितने बिजनिस प्लान, इवेंट प्लान, नोट्स एक्सचेंज, क्या क्या नहीं हुआ होगा उसकी एक cafe coffee day की काफी पीते हुए ?
सब कुछ हुआ होगा बस ये नहीं हुआ कि उस कॉफी पिलाने वाले को वो एक शख्स नहीं मिला जो कहता चल पहले काफी पिला फिर बता क्या टेंशन है, और कॉफी खत्म करके एक झप्पी देता और कहता कॉफी खत्म यानी टेंशन खत्म, बोल क्या करना है? मैं हूँ न । 
झांकिए, टटोलिये, पड़ताल करिए, विश्लेषण करिए अपनों की जिंदगी का, भूल जाइए उस अमानवीय और असामाजिक बनाने वाले डायलॉग को कि “हम एक दूसरे की निजी जिंदगी में तांकझांक नहीं करते” उनसे संवाद रखिये, उनसे मिलिए, बैठिए, कोशिश कीजिये अपना और अपनों के सुख-दुख को सांझा करने की । ये भी देखिए कि कहीं हमारे व्यवहार और सोच के कारण कहीं अपने ही लोग हमसे बात करने में डरते, झिझकते तो नहीं है ।
अगर हमारे होते हुए कोई हमारा अपना अवसाद, नैराश्य, एकाकीपन, के दंश से नीला पड़ रहा है तो याद रखिये दुनिया और कानून की नजरों में भले तुम दोषी नहीं हो लेकिन आईने के सामने खड़े होकर कभी नहीं स्वीकार पाओगे की तुम निर्दोष हो ।
ये जो आपस मे संवाद कायमी, सुखदुख का बांटना, मिलना बैठना सुनना-सुनाना , संवेदनशील होना, है न ये कोई ऐसे टार्गेटेड साफ्टवेयर नहीं है जो हमे और आपको बाहर से लाकर अपने आप मे इंस्टॉल करना है, ये तो हमारे वो मानवीय गुण है जो नैसर्गिक रूप इंस्टॉल है बस हुआ ये है कि असीमित महत्त्वाकांक्षाओं, 100% सफलता से कम कुछ स्वीकार नहीं, असामाजिक जीवनशैली जैसे वायरसों ने इन्हें करप्ट कर रखा है, सिर्फ एक बार श्री गणेश करिए सारे मानवीय गुण फिर प्रकट हो जाएंगे और फिर शायद कोई हमारे “”सिद्धार्थ”” ऐसे कम से कम बिना बताए तो नहीं जाएंगे।

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