बरुआसागर: पालिकाध्यक्ष पति क्या फिर थामेंगे सपा का दामन ?

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बरुआसागर। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने नगर में चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है। वायरल वीडियो में नगर पालिका बरुआसागर की अध्यक्ष के पति ओमप्रकाश कुशवाहा उर्फ ओमी कुशवाहा पत्रकारों के सवालों के जवाब देते नजर आ रहे हैं और उनके साथ खड़े हैं रिश्ते में उनके भतीजे और जिला पंचायत के वार्ड नंबर आठ फुटेरा से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मयंक कुशवाहा उर्फ ईलू कुशवाहा, और जगह है शायद कलेक्ट्रेट झाँसी जहाँ नामांकन के पश्चात मीडिया से मुखातिब हैं ओमी कुशवाहा। जिसमें पत्रकारों के सवालों के जवाब में वे कहते हुये दिखाई व सुनाई दे रहे हैं कि उनके परिवार पर स्थानीय जनता भरोसा करती आई है और उनको विजयी बनाती रही है। यहाँ तक तो सब सामान्य है फिर आप कहेंगे इसमें चर्चा जैसा विशेष क्या है? याददाश्त पर पड़ी धूल की परत आप जैसे ही झटकेंगे आपको फौरन याद आ जायेगा कि ओमी कुशवाहा और उनका परिवार समाजवादी पार्टी के नगर के कद्दावर नेताओं में शुमार हुआ करते थे और उससे भी पहले कांग्रेस के वजनदार नेताओं में उनकी गिनती हुआ करती थी। मगर समय का फेर कहें या सियासी मजबूरियां नगर पालिका अध्यक्ष पद पर अपनी पत्नी को जिताने के बावजूद भी ओमी कुशवाहा को पिछले दरवाजे से भाजपा में एंट्री लेनी ही पड़ी। मगर एक सच यह भी है कि न तो वे कभी मन से भाजपाई हो सके और न ही स्थानीय भाजपा ने उनको कभी खुले मन से अंगीकार किया। बहरहाल इसी उहापोह और खींचतान में तीन साल बीत गए बीच में कई मौके ऐसे आये जब भाजपा की खेमेबाजी और नगर की अन्दरूनी सियासत के चलते उनको तमाम दुश्वारियां झेलने को मजबूर होना पड़ा मगर सत्ता पक्ष के एक गुट का मजबूत समर्थन हासिल होने के चलते उनसे निजात न सही राहत ज़रूर मिलती रही। पिछले कुछ समय से भाजपा में उनकी घुटन और छटपटाहट स्पष्ट महसूस होने लगी थी, जो यदा-कदा सार्वजनिक तौर पर भी ज़ाहिर हो जाती थी। जानकार बताते हैं कि ओमी कुशवाहा की कुंडली भाजपा और भाजपाइयों से कभी मिली ही नहीं सियासी मजबूरियों के चलते भले ही भाजपा का दामन थाम लिया हो मगर इस बेमेल गठबंधन का हश्र यही तय था, ये भी सब समझते थे। आश्चर्य सिर्फ इस बात का है कि घर वापसी कहें या मोह भंग इसकी टाइमिंग सियासी जानकारों में चर्चा का मुद्दा है। पंचायत चुनाव में अध्यक्ष प्रतिनिधि का अपना व्यक्तिगत कुछ दांव पर नहीं लगा है। ईलू कुशवाहा के लिए अपने पिता का नाम और समाजवादी पार्टी का टिकट अखाड़े में लड़ने के लिए काफी है। स्थानीय निकाय चुनाव को अभी लगभग दो साल का समय है, तो विधानसभा चुनाव के लिए भी कमोवेश एक साल का वक्त बाकी है। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि कल तक मीडिया में वरिष्ठ कद्दावर भाजपा नेता का विशेषण अपने नाम के पहले पाने वाले ओमी कुशवाहा को रातों-रात घर वापसी का फैसला लेना पड़ा? सवाल कई हैं और जवाब वक़्त के फंदे में। हालांकि इन पंक्तियों के लेखक ने जब ओमी कुशवाहा से इस बारे में जानना चाहा तो वे बड़ी सफाई से इसे घर का मामला बता गए और बोले भतीजा है इस नाते साथ हैं। बहरहाल मामला भले ही घर का हो लेकिन जब मंज़िल और रास्ते ज़ुदा होते हुए भी दोनों हमराह नज़र आ रहे हैं तो चर्चा होना लाजिमी है।

✍️राजीव बिरथरे

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