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महरौनी: पीला मोजेक ने नष्ट की उर्द सोयाबीन की फसल, सर्वे कराये जाने की उठी मांग

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महरौनी (ललितपुर) वर्तमान में खरीफ की फसल बोई गई है किसानों को इस फसल से बड़ी आस रहती है । उड़द और मूंग की खेती कर रहे किसानों को फसल में पीले मोजेक रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं जिससे किसान काफी चिंतित व परेशान हैं। किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों से फसल में रोकथा के उपायों की जानकारी भी मांगी है। लेकिन बताए गए उपाय ज्यादा कारगर साबित नहीं हुए। बीते कुछ सालों से किसानों का रुख खरीफ की खेती की ओर अधिक बढ़ा है। जिले में खरीफ फसल के रूप में सबसे ज्यादा उड़द और मूंग बोई जाती है। उड़द और मूंग की फसल में इन दिनों पीला मोजेक रोग का प्रभाव देखने को मिल रहा है।
कुम्हेडी निवासी किसान मथुरा प्रसाद ने बताया, उन्होंने अपने खेत में करीब 14 एकड में उड़द और मूंग की फसल बोई है। इन फसलों में अभी पेड़ और डंठल पीले पड़ चुके हैं। इस तरह से एक अन्य किसान प्रमोद कुमार ने बताया, उन्होंने मूंग तथा उड़द की फसल लगाई थी। उनके खेत में भी लगी मूंग में पत्ते पीले हो गए साथ ही फली भी पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। किसानों ने बताया, धीरे-धीरे यह रोग बढ़ता जाता है। एकबार फसल में रोग फैलने के बाद दवाओं के छिड़काव से भी यह पूरी तरह से खत्म नहीं हो रहा है। इस रोग की चपेट में कुम्हेडी, बारौन, खिरिया भारंजू, कोरवास, भौंडी के किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। किसानों ने यह भी बताया कि समय पर सर्वे न होने के हजारों किसानों को बीमा राशि का लाभ नहीं मिल पाता है और लेखपालों द्वारा सही रिपोर्ट न लगाने के कारण उचित मुआवजा भी नहीं मिल पाता है। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी फसल का सर्वे कराया जाए तथा फसलों में हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए ।

“हमारा कृषि विभाग के साथ संयुक्त रूप से सर्वे का कार्य चल रहा है जिसमें लेखपाल भी सम्मिलित हैं। जिस गांव में जो भी नुकसान होगा उसकी भरपाई बीमा कंपनी या सरकार करेगी किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं”-श्रीकृष्ण, तहसीलदार महरौनी

✍️प्रदुम दुबे

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