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ललितपुरः पुलिस कर्मियों को बताये क्षय रोग से बचवे के उपाय

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पुलिस लाइन सभागार में हुआ विश्व क्षयरोग दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन
ललितपुर। विश्व क्षयरोग दिवस पर रिजर्व पुलिस लाइंस सभागार में आयोजित संगोष्ठी/कार्यशाला में पी.पी.टी.प्रस्तुततीकरण करते हुये क्षय रोग अधिकारी डा.जे.एस.बक्शी ने बताया कि भारत वर्ष में प्रतिवर्ष 18 लाख लोग टी.बी. की बीमारी से ग्रसित होते हैं तथा उनमे से 4 लाख लोग प्रतिवर्ष मर जाते हैं। विश्व में टी.बी. की बीमारी में भारतवर्ष 5वां स्थान रखता है तथा 22 सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत टॉप पर है और यह भी बताया कि 1962 से 1992 तक राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम चला, तत्पश्चात 1993 में एक पायलट प्रोजैक्ट के तहत 23.5 लाख जनसंख्या पर डॉट्स प्रणाली अपनाकर प्रभाव देखा गया जो कि बहुत ही सफल रहा और 1997 तक पूरे देश में डॉट्स पद्धति को लागू कर दिया गया। और यह भी बताया कि संदिग्ध रोगी के 02 बलगम परीक्षण कर रोग के बारे में पता लगाया जाता है। तदुपरान्त रोगी को डॉट्स केन्द्र पर प्रषिक्षित कार्यकर्ता की देखरेख में दवा खिलाई जाती है। वर्तमान में जनपद में 07 टी.बी. यूनिट एवं 11 बलगम परीक्षण केन्द्र तथा 342 डॉट्स केन्द्र कार्यरत हैं। जहां रोगी का निशुल्क बलगम परीक्षण एवं निशुल्क दवा खिलाई जाती है। डॉट्स में रोगी के पंजीकरण के साथ ही उसकी दवाई के पूरे उपचार का औषधि बॉक्स सुरक्षित कर दिया जाता है। अन्य बीमारियों की अपेक्षा टी.बी. से मरने वालों की संख्या वयस्कों में सबसे ज्यादा होती है। वर्तमान औषधियों के प्रति रोग के कीटाणुओं में प्रतिरोधात्मक क्षमता विकसित होने के बारे में भी प्रकाश डाला और जनपद ललितपुर भी डॉट्स प्लस कार्यक्रम से आच्छादित चुका है। जून 2016 से जिला क्षयरोग नियंत्रण केन्द्र ललितपुर में सीबीनॉट मशीन द्वारा ड्रग रेसिस्टेन्ट टी.बी. की जांच का कार्य प्रारम्भ हो चुका है। और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा संचालित की जा रही निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत क्षयरोगियों को 01 अप्रैल 2018 से इलाज के दौरान पोषण सहायता प्रदान करने हेतु 500 रूपया का इन्सेंटिव प्रतिमाह प्रति रोगी की सहायता, टी.बी. रोग के लक्ष्णों, डॉट्स प्रोवाइडऱों के कैटेगरी प्रथम, द्वितीय एवं एमडीआर के मानदेय 1000, 1500 एवं 5000 के बारे में, टी.बी. रोग की जांच, उपचार, एम.डी.आर. होने व एमडीआर के उपचार और जांचों इत्यादि के बारे में तथा टीबी से सम्बंधित भ्रांतियों के बारे में पूर्ण तथा विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। सीएमओ डा.डी.के.गर्ग ने बताया कि 24 मॉर्च को क्षयरोग दिवस इसलिये मनाया जाता है क्योंकि इस दिन जर्मन के फिजीशियन एवं माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट सर राबर्ट कोच ने 24 मॉर्च 1982 को टीबी के जीवाणु की खोज की थी। यह खोज आगे इसके इलाज में बहुत सहायक बनी इसलिये विश्व भर में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये विश्व क्षयरोग दिवस के रूप में 24 मार्च को चुना गया। राबर्ट कोच सूक्ष्म जैविकी के क्षेत्र में युग पुरूष माने जाते थे इन्होंने कॉलरा, एंनथ्रेक्स तथा क्षयरोगों पर गहन अध्ययन किया। अत में कोच ने यह सिद्ध कर दिया था कि कई रोग सूक्ष्म जीवों के कारण होते हैं इसके लिये सन् 1905 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि टी.बी.को तपेदिक और राजयक्ष्मा के नाम से भी जाना जाता है और यह बीमारी प्राचीन काल से ही चली आ रही है और लाइलाज बीमारियों में सुमार थी किन्तु वर्तमान समय में टी.बी. का पूर्ण इलाज संभव है नियमित दवा खाने से यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। इस अवसर पर क्षेत्राधिकारी सदर, आर.आई. पुलिस लाइन, दीपाली पटैरिया, साई ज्योति संस्था के सचिव अजय श्रीवास्तव, अक्षय परियोजना जिला समन्वयक विवेक सिंह, पुलिस अधिकारी व जवान तथा जिला क्षयरोग नियंत्रण केन्द्र के समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुये आर.आई.पुलिस लाइन ने संगोष्ठी का समापन किया।

केतन दुबे- ब्यूरो रिपोर्ट
📞9889199324

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