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ललितपुरः जीएसटी में सरलता के लिए फेम ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

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6 सूत्रीय समस्याओं के जल्द निस्तारण की उठायी मांग
ललितपुर। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सुमित अग्रवाल के नेतृत्व में राष्ट्र के लघु व्यापारियों हेतु सरल एवं सुगम जीएसटी कानून बनाने हेतु प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि राष्ट्र के अग्रणी व्यापारिक संगठन फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल की 200 से भी ज्यादा जनपद इकाई एवं सहयोगी संस्थाओ द्वारा अपने अनुरोध पत्र जो 22 फरवरी 2021 को जनपद के जिलाधिकारी / उपयुक्त के माध्यम से आपको भेजा गया था , के माध्यम से आपसे अनुरोध किया गया था कि जीएसटी की बढ़ती जटिलताओं के कारण लघु व्यापारियों द्वारा अनुपालन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए वर्तमान जी एस टी कानून में संरचनात्मक परिवर्तन की आवश्यकता है।
पुनरू फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल की 400 से भी ज्यादा जनपद इकाई एवं सहयोगी संस्थाओ द्वारा आपको उपरोक्त आग्रह का पुनरू स्मरण करने हेतु यह अनुरोध पत्र भेजा जा रहा है। प्रधानमंत्री, जैसा विदित है कि भारत का परंपरागत लघु खुदरा व्यापारी, भारत की अर्थव्यवस्था में एक रीढ़ की हड्डी के समान है। वह न केवल सरकार का बोझ काम करने हेतु स्वरोजगार करता है। वरन राष्ट्र के 44 करोड़ युवाओ को भी रोजगार प्रदान करता है। जीएसटी राजस्व संग्रह में सिर्फ 20 प्रतिशत संग्रह व्यापारियों से प्राप्त होता है जबकि 80 प्रतिशत संग्रह उद्योग एवं सेवा क्षेत्र से प्राप्त होता है। ऐसी अवस्था में यदि लघु व्यापारियों के लिए जीएसटी के प्रावधानों को सरल एवं सुगम कर दिया जाए तो राष्ट्र का प्रत्येक व्यापारी अपना सम्पूर्ण सामर्थ्य व्यापार बढ़ानेमें लगाएगा और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी और ज्यादा सुनिश्चित करेगा। जिस प्रकार समय समय पर सरकार पुराने कानूनों की समीक्षा करती है और समय की मांग एवं पूर्व में हुए अनुभव के आधार पर कानूनों में संशोधन कर नया कानून बनाती है, ठीक उसी प्रकार वर्तमान जीएसटी को सरल सुगम बनाने हेतु एक नया संशोधित जीएसटी कानून पारित करे जो लघु व्यापारियों को आर्थिक एवं मानसिक उत्पीडऩ से रक्षा कर सके। नए जीएसटी कानून के विषय में निम्न सुझावों का यदि अमल में लाया जाता है, तो व्यापारिक वर्ग को एक बड़ी सुगमता एवं सरलता का अहसास होगा एवं व्यापारियों को स्वेच्छा से कर अनुपालन को प्रेरित करेगा। वर्तमान जीएसटी की सीमा व्यापारी के लिए 40 लाख वार्षिक एवं सेवा प्रदत्त के लिए 20 लाख वार्षिक को बढ़ाकर, एक सामान 75 लाख वार्षिक की जानी चाहिए। ऐसा करने से सरकार के राजस्व में सिर्फ तिल मात्र असर पड़ेगा परन्तु लाखो व्यापारियों को कठिन अनुपालन से मुक्ति प्राप्त हो जाएगी। जीएसटी के सिर्फ 3 स्लैब करे दिए जाए जैसे कि आवश्यक वस्तुए, खाद्य पदार्थ दवाइया, आराम के वस्तुए, कॉस्मेटिक इत्यादि विलासता की वस्तुए ऐसा करने से ॥स्हृ कोड के प्रयोग की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। आज अधिकतर व्यापारी कोड में विभ्रान्ति के चलते गलती कर बैठता है और आर्थिक दंड का भागीदार बनता है। विक्रेता को जीएसटी का भुगतान करने के पश्चात भी क्रेता व्यापारी को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाता क्योंकि विक्रेता व्यापारी यदि किसी भी कारणवश अपना त्रस्ञ्जक्र-1 नहीं भर पाता या विक्रेता व्यापारी बदनीयती से सरकार को कर जमा नहीं करता, ऐसी अवस्था में बिना किसी गलती के करता व्यापारी दंड का भागीदार जाता है और पुनरू एक बार फिर से उसे जीएसटी भरना पड़ता है। यदि क्रेता व्यापारी जीएसटी भुगतान का सम्पूर्ण साक्ष्य देता है उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त होना चाहिए और विक्रेता व्यापारी को दण्डित करना चाहिए। वर्तमान में जीएसटी की विवरणी में अनजाने हुई त्रुटि को सुधारने का कोई प्रावधान नहीं है। वेदो में कहा गया है कि गलती का अहसास होने पर उसकी पुनरावृत्ति का न होना सबसे बड़ी क्षमा है। जीएसटी में भी अनजाने अनजाने हुए त्रुटि को सुधारने का एक अवसर अवश्य देना का प्रावधान होना चाहिए। एक राष्ट्र एक कर होने की बाद भी व्यापारियों को बिल में अलग अलग गणना करनी पड़ती है, और इसी तरह कर का इनपुट क्रेडिट लिया जाता है और कर बैंक में जमा करना पड़ता है। यह आवश्यक है कि व्यापारी सिर्फ जीएसटी की गणना करे जीएसटी का भुगतान करे और जीएसटी कौंसिल टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्राप्त हुए कर को बहुत आसानी से ढ्ढत्रस्ञ्ज, ष्टत्रस्ञ्ज, स्त्रस्ञ्ज. की पृथक पृथक गणना कर दे। जी एस टी विवरणी में हुए भूल या देरी के कारण लगने वाले अनेको प्रकार के आर्थिक दंड की मात्रा बहुत ज्यादा अधिक एवं दमनकारी है। आर्थिक दंड इस प्रकार लगना चाहिए कि व्यापारी को दंड भी मिल जाए और व्यापार भी चलता रहे। व्यापारियों ने प्रधानमंत्री से राष्ट्र के लघु व्यापारियों के हितो की रक्षा हेतु सरकार द्वारा उपरोक्त आग्रह पर बड़ी गंभीरता से मनन किया जाएगा और नए भारत हेतु नए जीएसटी कानून का पदार्पण होगा। ज्ञापन के दौरान सचिन नामदेव, निक्की जैन, रविकुमार सोनी, जगदीश, अजय कुमार, दीपक सोनी, ब्रजेश ताम्रकार, विकास सोनी, धर्मवीर कुशवाहा, रोशन, मु अमजद, करीम राइन पप्पू आदि शामिल रहे।

केतन दुबे- ब्यूरो रिपोर्ट
📞9889199324

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