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ललितपुरः केन-बेतवा के दूसरे चरण में कऊं प्यासो ना रे जाए अपनौ बुन्देलखण्ड

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विदिशा और रायसेन जिले में बेतवा नदी पर बनने हैं 4 बांध, इससे पानी वहीं रुक जाएगा
मध्यप्रदेश में होने वाली बारिश से ललितपुर जिले के राजघाट और माताटीला बांध भरते हैं
ललितपुर। शूरवीरता, पराक्रम, पुरातात्विक-भूगर्भ संपदा और सम्रद्ध इतिहास वाले बुंदेलखंड की पहचान अब सूखा, बेरोजगारी और पलायन से है। सूखे को तो बुंदेलियों ने अपनी नियति मान ही लिया है। केन्द्र सरकार की नदी जोड़ी योजना के पहले चरण में केन-बेतवा नदी को लिंक किया जा रहा है। इससे बुंदेलखंड के सूखे को मिटाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, इसका दूसरा चरण बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, दतिया आदि जिलों में सूखे की इबारत लिख सकता है। केन-बेतवा प्रोजेक्ट के सेकेंड फेज में रायसेन और विदिशा जिले में बेतवा नदी पर चार बांध बनने हैं। इससे मध्यप्रदेश के रायसेन, विदिशा, सागर जिलों की पानी की समस्या को समाधान हो जाएगा, लेकिन, यूपी के ललितपुर, झांसी और मध्यप्रदेश के दतिया में पानी का संकट खड़ा हो सकता है। दरअसल, ये तीनों जिले सिंचाई और पीने के पानी के लिए ललितपुर जिले में बेतवा नदी पर बने राजघाट बांध और माताटीला बांध पर निर्भर हैं।

वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र कृष्ण तिवारी बताते हैं कि भोपाल में होने वाली बारिश से वहां का तालाब और उससे निकलने वाली कालियासोत नदी उफतानी है तो उसका पानी बेतवा नदी में जाता है। यह पानी रायसेन से विदिशा बीना होते हुए ललितपुर में आता है और इससे राजघाट बांध भरता है। भोपाल के अलावा विदिशा, रायसेन और अशोक नगर में होने वाली बारिश का पानी भी बेतवा का प्रवाह बढ़ाकर राजघाट बांध तक पहुंचता है। राजघाट बांध जब ओवरफ्लो होता है तो इसका पानी माताटीला बांध को भरता है। माताटीला बांध से छोड़ा गया पानी झांसी जिले के सुकवां-डुकवां और पारीछा बांध को लबालब करता हुआ आगे जालौन और हमीरपुर जिले की प्यास बुझाता हुआ यमुना नदी में मिल जाता है। ऐसे में जब विदिशा और रायसेन में लगातार चार बांध बन जाएंगे तो बेतवा का पानी वहीं रुक जाएगा, जिससे राजघाट बांध भरने के लिए वहां से छोड़े गए पानी और अशोकनगर व ललितपुर जिले में बारिश का इंतजार करना पड़ेगा। राजघाट बांध से जहां ललितपुर, शिवपुरी, अशोकनगर समेत कई जिलों में पीने और सिंचाई का पानी जाता है, वहीं, माताटीला बांध से झांसी दतिया, तालबेहट, बबीना की प्यास बुझती है। माताटीला बांध बना जरूर ललितपुर जिले में है, लेकिन इससे निकलने वाली नहरें झांसी, दतिया और डबरा के खेतों को सिंचित करती हैं।
ललितपुर में झमाझम होने से पहले लबालब हो जाते हैं दोनों बांध
राजघाट बांध की क्षमता 371 मीटर और माताटीला बांध 308.45 मीटर है। 2017, 2018, 2019 और 2020 में दोनों बांधों के गेट उस समय खुल चुके थे, जब जिले में झमाझम बारिश का इंतजार किया जा रहा है। इन दोनों बांधों के गेट खुलने से झांसी का सुकवां-डुकवां और पारीछा बांध भी लबालब हो गए थे। इस दौरान ललितपुर में भले ही बारिश नहीं हुई हो, लेकिन भोपाल, रायसेन, विदिशा और अशोक नगर जिले में अच्छी बारिश हो रही थी।
बेतवा की सहायक नदियों पर बने बांध भी भरते हैं
राजघाट और माताटीला बांध से छोड़ा गया पानी बेतवा की सहायक नदियों पर बने बांध, शहजाद, सजनम, गोविंद सागर, जामनी आदि में भी जल भंडारण होता है।

धर्मेंद्र कृष्ण तिवारी
धर्मेंद्र कृष्ण तिवारी
वरिष्ठ पत्रकार

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