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ललितपुरः सरकार मदीने में बुला क्यों नही लेते, कमली में गरीबों को छुपा क्यों नहीं लेते

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उर्स के दूसरे दिन सुबह तक जमी रही महफिल
ललितपुर। महान सूफी सन्त हजरत बाबा सदनशाह रहमतउल्लाह अलैह की दरगाह पर चल रहे सालाना उर्स इजलास के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सभी धर्म के श्रद्धालुओं ने बाबा की दरगाह पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। मशहूर फनकार जुनैद सुल्तानी व सईद फरीद निजामी की कव्वालियों ने अपने फन का ऐसा जादू बिखेरा कि लोग झूमने पर मजबूर हो गए। श्रोता कव्वालियों का लुत्फ उठाते रहे। अजीम सूफी सन्त हजरत सदनशाह रहमत उल्ला अलैह के सालाना उर्स के मौके पर गुरुवार की रात मशहूर फनकार जुनैद सुल्तानी की महफिल सजी। उन्होंने रात से सुबह तक खुदाऔर नवी की शान व हुसैनी रंग से ख्वाजा व बाबा सदन की शान में मनकवत का दौर चला। रात से सुबह तक जुनैद सुल्तानी समां बांधे रहे। सबसे पहले उन्होंन खुदा की शान में नात ए हम्द पढ़ी। इसी दौरान नवी के मर्तबा को बताते हुये नाते पाक सरकार मदीने में बुला क्यों नही लेते, कमली में गरीबों को छुपा क्यों नहीं लेते, घटा छा सकती है लेकिन बराबर छा नहीं सकती, मोहम्मद के गुलामों पर मुसीबत आ नहीं सकती। आजा ख्वाजा की शान में तेरे दरबार से एक बार मदीना जाऊं, तू अगर दे दे मुझे इजाजत ख्वाजा, एक अदना को तुम सुल्तान बना देते हो, एक भिखारी को सुल्तान बना देते हो, ऐसी होती है तेरी करामात ख्वाजा जी। इसके बाद उन्होंने जैसे ही बाबा सदन की शान में पढ़ा- रोज देता है और बार बार देता है हमारा सदन हमें बेसुमार देता है, सदनशाह बाबा मुझे देते हैं तो काम चलता है, इनके टुकड़ों पर मेरा खानदान चलता है। जिसको श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध होकर सुना और नवी की शान में नारे लगाने शुरु कर दिये। जिसे सुनकर लोग जमकर झूम उठे ब नोट की बारिश कर दी। कव्वालियों का सिलसिला सुबह तक चलता रहा।

केतन दुबे- ब्यूरो रिपोर्ट
📞9889199324

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