Home Hindi चंदेरी: शनिश्चरी अमावस्या पर शनि मंदिर पर लगा भक्तों का तांता

चंदेरी: शनिश्चरी अमावस्या पर शनि मंदिर पर लगा भक्तों का तांता

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चन्देरी :– शनिश्चरी अमावस्या पर शनिवार जुगनू बावड़ी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।बड़ी बात यह रही कि दूर-दूर से आये श्रद्धालु ने बावड़ी पर नहाने के बाद अपने कपडे और जूते दान के रुप में बावड़ी पर ही छोड़ गए।

दरअसल शनिवार को आने वाली अमावस्या को शनिचरी अमवस्या कहते है और चन्देरी शहर का प्रसिद्द शनिचरा मंदिर पर प्रति शनिचरी अमवस्या को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। बड़ी संख्या में आये श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद भगवान शनि को तेल चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लेते है। उसके बाद दान के रूप में अपने कपड़े या जूते बावड़ी पर ही छोड़ जाते है। जिनको बाद में मंदिर का ठेकेदार जोशी जूता चप्पलो को नीलाम कर देता है।

मान्यता पर जूते चप्पल और कपडे छोड़ते हैं, श्रद्धालु

ऐसी मान्यता है कि शनिचरी अमावस्या पर नहाने के बाद दान करने से पुण्य लाभ होता है और यहीं कारण है कि पुरुष और महिलायें सभी अपने ऊपर से बुरे गृह की दशा से बचना चाहते है और शनिचर अमावस्या पर जो भी भक्त बावड़ी के पानी से नहाता है. उसके बाद वो अपने कपड़े-जूते-चप्पल आदि सामान उसी स्ठान पर छोड़कर चला जाता है और देखते ही देखते जूते और कपड़ो का ढेर लग जाता है. इसके बाद इन सभी छोड़े गए सामान की ठेकेदार द्वारा नीलामी कर दी जाती है.

विशेष मुर्हुत और शनि की पूजा से लाभ

गुरूजनों के अनुसार अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म भी किया जाता है. इस दिन स्नान और दान का भी विशेष महत्त्व होता है. शनिवार के दिन अमावस्या की तिथि पड़ने के कारण इस दिन शनि देव की पूजा करने से विशेष शांति होती है. जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या चल रही और पितृ दोष, काल सर्प योग, अशुभ गृह योग सहित अन्य कठनाईयो से इस दिन शनिदेव की पूजा से लाभ मिलता है।

✍️दिनेश प्रजापति

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