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महोबा: ट्रस्ट न बनने की वजह से, 52 शक्ति पीठों में शामिल माँ चंद्रिका मंदिर ख्याति से भटका

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ट्रस्ट के लिए लोगो द्वारा उठने लगी है मांग

महोबा- विकास की हजारों संभावनाओं को अपने गर्भ में समेटे बावन सक्ति पीठों में गिना जाने वाला माँ बड़ी चंद्रिका एवं छोटी चंद्रिका का मंदिर 52 शक्ति में शामिल होने के बाबजूद वो ख्याति हासिल नही कर सके है जिसकी दरकार उन्हें है। गौरतलब हो कि वीर शिरोमणि आल्हा ऊदल की आराध्य देवी माँ चंद्रिका आज भी अपने स्थान पर आने वालों को कभी निराश नही करती । शहर के पक्षमी छोर कानपुर सागर राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर स्तिथ माँ का शक्ति पीठ क्षेत्रीय लोगो को अनायास ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।

एक शेल खंड मे अष्ट भुजाओं के साथ मुस्कुराती माँ की प्रतिमा ऐसे जान पड़ती है कि माँ अपने भक्तों से अभी बोल पड़ेगी। उक्त शांति पीठ यूं तो क्षेत्रिय लोगो की आस्था का केंद्र बिंदु है परंतु जो प्रसिद्धि मैहर की शारदा माँ, वैष्णो देवी, मंशा देवी, मिर्जापुर की विध्यवासिनी माँ अन्य माँ के शक्ति पीठों ने जो ख्याति प्राप्त की उससे माँ चंद्रिका शक्ति पीठ मंदिर हमेशा से वंचित रहा। उपरोक्त संबंध में माँ के कई भक्तो से जब इस संबंध में बात की गई तो कई ऐसे तथ्य सामने निकलकर सामने आए जिन पर कई वर्षों पहले ही यदि अमल हो गया होता तो आज माँ चंद्रिका भवानी की ख्याति चंद्र के समान दसों दिशाओं में रोशनी विखेर रही होती। अधिवक्ता चंद्रशेखर स्वर्णकार से जब पूछा तो उन्होंने कहा कि भारत वर्ष के जितने भी माँ के शक्ति पीठ विराजित है सभी ट्रस्ट के अधीन है। ट्रस्ट के हाथों में होने के कारण व्यवस्था को बनाये रखने एवं प्राप्त होने वाले गुप्त दान से न केवल मन्दिरो का विकास होता है बल्कि भक्तों को भी सुविधाए उपलब्ध होती है। उन्होने कहा कि यह महोबा का दुर्भाग्य ही है कि 52 शक्ति पीठों में शामिल चंद्रिका भवानी मंदिर का नाम जिले के बाहर नही लिया जाता। पूछे गए सवाल के जबाब में उन्होंने कहा कि माँ चंद्रिका मंदिर को ट्रस्ट के अधीन कर देना चाहिए। इसके अलावा योगेश यादव योगी, पंकज दीक्षित, तुलसीदास कोरी, मनोज पाल, अध्यापक मदन गौरव ने कहा कि यदि माँ चंद्रिका मंदिर का ट्रस्ट बनाया जाता है तो यहाँ विकास के साथ- साथ रोजगार की असीम संभावनाएं है। मंदिर प्रांगण के आस-पास जलपान ग्रह, भोजनालय, प्रसाद की दुकानों के अलावा ठहरने के लिए धर्मशालायें व होटल खुल सकेंगे। इसके अलावा महोबा दो राष्ट्रीय मार्गों सहित रेल मार्ग से भी जुड़ा है तथा मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर खजुराहो हवाई अड्डा होने से देशी और विदेशी भक्तो का आना जाना भी सुगम रहेगा। जिससे महोबा में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा एवं रोजगार श्रजित होंगे।
उल्लेखनीय है कि देवभूमि के नाम से विख्यात महोबा में चंदेल कालीन तथा पुरातात्विक महत्व की अनेको धरोहर ऐसी है जो विश्वमान पटल पर कतिपय कारणों के चलते नही आ सकी है। बताते चले कि यहाँ प्रमुख रूप से चंदेल कालीन सूर्य मंदिर, खखरामठ, बारादरी, आल्हा की गिल्ली, चकरिया दाई का मंदिर, मनिया देव की चौकी, गोखरगिरी पर्वत, ग्राम शालाठ में मठ के अलावा कस्बा चरखारी तो अपने दामन में पुरातात्विक धरोहरें सैलानियों के लिए सजाए बैठा है। यदि माँ चंद्रिका मंदिर का ट्रस्ट बनाकर विकास के पथ पर अग्रसर किया जाएगा तो निश्चित ही महोबा भी विकास के रथ पर दौड़ेगा।

✍️भरत त्रिपाठी

 

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