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आईएएस की राजनेता पत्नी पे भड़के भाजपा नेता, बोले खजुराहो लोकसभा मंदिर को घंटा है का ?

एक आई ए एस की राजनेता पत्नी की खजुराहो संसदीय सीट से दावेदारी पे भाजपा नेताओं में गुस्सा है. भाजपा नेता संजय नगाइच ने ई मामले में खुलके अपनी बात कही है.. पढ़ें..क्या लिखो संजय ने

खजुराहो लोकसभा ना होकर यह तो हो गया मंदिर का घंटा कोई भी आए कोई बजाय फिर 5 साल क्षेत्र को भूल जाए ।*
*सुना है उड़ीसा कैडर के कोई IAS officer की पत्नी खजुराहो लोकसभा से दावेदारी ठोक रही है और कथित रूप से नेता बनने के लिए पैसे और प्रभाव का उपयोग करते हुए होर्डिंग दीवार लेखन करवा कर के वह शॉर्टकट में ही नेता बनना चाह रही हैं उनका राजनीतिक, सामाजिक बैकग्राउंड क्या है ??  किसी को कुछ पता नहीं है भाजपा संगठन में क्या काम किया शून्य बस इतना है कि वह रसूखदार है आईएस अधिकारी की पत्नी है पैसे वाली है हो सकता है पैसे और आईएएस की पत्नी होने के कारण पहुंच भी हो फिर उनका अतीत यह है कि उन्होंने पिछली बार भाजपा की राष्ट्रीय नेता केंद्रीय मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री बुंदेलखंड की बेटी उमा भारती जी के भतीजे राहुल लोधी को हराने के लिए सामंतवादियों के प्रभाव में भाजपा के खिलाफ बीएसपी से अधिकृत चुनाव लड़कर के भाजपा को हराया था अब वह भाजपाई कब से हो गई क्या यह उनकी काबिलियत है फिर राजनीतिक क्षेत्र में बरसों से काम करने वाले कार्यकर्ता नेता मूंगफली छीलेगे क्या ??*
*फिर सांसद राजनीतिक सामाजिक अनुभवी नैसर्गिक नेता बनना चाहिए कि रसूखदार धनबली, बाहुबली पैसे वालों बननने चाहिए अपने पैसे और प्रभाव से टिकट खरीद कर लाएंगे तो फिर जनता को लूटेंगे नहीं फिर समाज सेवा और राजनीतिक अनुभव हीनता के कारण पार्टी के खिलाफ जनता का आक्रोश पैदा करवाएंगे पहले अधिकारी कर्मचारी रहते हुए बरसो मलाई खाई अब उसी रसूख के प्रभाव में पैराशूट नेता बन कर यहां मलाई खाएंगे, ऐसे लोगों का संगठित होकर के जबरदस्त विरोध होना चाहिए चाहे वह किसी भी दल में हो ।*
*राजनीतिक क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत तपे तपाए कार्यकर्ता नेता जो दरी बिछाकर, झंडे लगाकर, आंदोलन, प्रदर्शन में जेल जाकर के वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं उनको मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए ?  जिनके दम पर पार्टीया खड़ी हैजो असली पोलिंग बूथ पर पार्टी के लिए लड़ता है राजनीतिक पार्टियों में जिम्मेवारी उनके लिए होनी चाहिए ना कि बरसों से अधिकारी कर्मचारी रहकर पीछे के दरवाजे से आकर कथित नेता बनकर ।
*खैर यही नहीं खजुराहो लोकसभा अभी तक के बनने वाले सांसद लोकसभा क्षेत्र के बाहर के रहे हैं जिनका भावनात्मक लगाव संसदीय क्षेत्र ना होने के कारण उन्होंने क्षेत्र पर कोई ध्यान नहीं दिया उनका राजनीतिक गतिविधि का केंद्र स्वयं का अपना जिला ही रहा हैं इसलिए सबसे पहली मांग तो यही है कि हर क्षेत्र में चाहे वह विधानसभा हो चाहे लोकसभा हो उस क्षेत्र का नेतृत्व विधायक और सांसद स्थानीय ही होना चाहिए इसी प्रकार से खजुराहो लोकसभा के साथ में विगत 10 वर्षों से जिस प्रकार का अन्याय हो रहा है ललितपुर सिंगरौली रेलवे लाइन आज तक अधूरी पड़ी है देश का शायद एकमात्र एकमात्र खजुराहो संसदीय क्षेत्र का मुख्यालय पन्ना जिला होगा जिसको रेलवे लाइन छूती भी नहीं है किसी सांसद को फुर्सत नहीं है वह संसद से लेकर सड़क तक जिले में रेलवे लाइन के लिए कुछ पहल करें यही नहीं बुंदेलखंड के अति पिछड़े खजुराहो संसदीय क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से वंचित है स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, शिक्षा वह भी प्राइमरी और महाविद्यालीन व्यवसायिक शिक्षा इंजीनियरिंग और मेडिकल तो बहुत दूर की बात है, सड़कें जैसी मूलभूत जरूरतों का भारी अभाव है । एक विशेषता है पन्ना जिले की हर तहसील से दिल्ली और हरियाणा बसें चलती हैं वह किसी रोजगार उद्योग धंधे काम के लिए नहीं जिले के पलायन कर रहे मजदूरों को दिल्ली और हरियाणा ले जाने के लिए, रोजगार के लिए आज भी बुंदेलखंड के लोग हरियाणा और दिल्ली मजदूरी करने जाते हैं इस क्षेत्र का आधे से ज्यादा किसान और सभी वर्गों के लोग मजबूरन पलायन करते हैं मेडिकल कॉलेज बनाने का आंदोलन आश्वासन पन्ना कटनी छतरपुर में होता है सांसद नदारद और सांसद सतना ले जाते हैं चाहे यूनिवर्सिटी हो चाहे इंजीनियरिंग कॉलेज हो या अन्य कोई प्रोफेशनल कॉलेज हो या कोई व्यवसाय केंद्र, उद्योग, कारखाने या फैक्ट्री लगाने का काम हो तो इस क्षेत्र के साथ में हमेशा सौतेला पन हुआ है हमेशा अन्याय हुआ है अब यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा हमारा सांसद क्षेत्रीय और स्थानीय जन भावनाओं के अनुरूप ही बनना चाहिएक्षेत्र के भूगोल और इतिहास को समझे और यहां के विकास रोजगार और पर्यटन की संभावनाओं के लिए लड़े संघर्ष करें मुझे यहां के लिए मरे मिटे यहां के लोगों की समस्याओं पर आवश्यकता कभी पड़े तो खड़ा हो अब बाहरी नेता किसी रसूखदार धनबली बाहुबली या प्रभावशाली बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे खजुराहो लोकसभा के मतदाताओं को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर के स्थानीय सांसद और विकास के लिए आगे आकर के यह अलख जगाने में सहयोगी बनना चाहिए यही समय की मांग है और हमें लगता है कि सभी पार्टियों इसको समझेंगे और संसदीय क्षेत्र की जन भावनाओं को सम्मान देती हुई स्थानीय, राजनीतिक अनुभवी, जुझारू, संघर्षशील और राजनीतिक पृष्ठभूमि के ही प्रत्याशियों को मौका देंगी ।*
*संजय नगायच*
*पूर्व अध्यक्ष*
*जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पन्ना (मप्र)*

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